Facebook 0 Twitter/X 0 WhatsApp0 Print0 0Shares पब्लिक न्यूज आसनसोल। पीरे पीरां, दस्तगीर, महबूब-ए-सुब्हानी हज़रत शेख सैयद अब्दुल कादिर जिलानी (र.अ) की याद में मनाए जाने वाले ग्यारहवीं शरीफ के मुबारक मौके पर आसनसोल के मशहूर समाजसेवी हाजी अताउल्लाह खान के यहाँ हर साल की तरह इस साल भी अज़ीमुश्शान लंगर और फातिहा ख्वानी का एहतमाम किया गया। ग्यारहवीं शरीफ इस्लाम में बहुत ही अकीदत और एहतराम का दिन माना जाता है। इस दिन गरीबों, मोहताजों को खाना खिलाना और इसाले सवाब करना सवाब का काम समझा जाता है। इसी परंपरा को निभाते हुए हाजी साहब के यहाँ देर शाम से ही अकीदतमंदों का आना शुरू हो गया था। खास बात यह रही कि इस दौरान आसमान से तेज बारिश हो रही थी। सड़कों पर पानी भर गया था, कीचड़ और फिसलन के बावजूद अल्लाह के करम से आशिकों का जोश कम नहीं हुआ। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि बाहर तेज बारिश में लोग छाता लेकर और भीगते हुए कतार में खड़े हैं। कई लोगों की बाइकें और टोटो सड़क किनारे खड़ी हैं। हाजी साहब के मकान के बाहर एक पंडाल बनाया गया था, जिसमें नारंगी और सफेद पर्दे लगे थे और झालर लाइटों से सजावट की गई थी। पंडाल के अंदर एक टेबल पर लंगर के लिए बड़ी तादाद में खाने के बक्से तैयार रखे गए थे, जिन्हें बारी-बारी से लोगों में तकसीम किया जा रहा था। अंदर के हॉल का नजारा और भी रूहानी था। हॉल को फूलों और लाइटों से सजाया गया था। सैकड़ों की तादाद में लोग जमीन पर दरी और चटाई पर बैठकर वज़ और नात सुन रहे थे। वहीं एक अलग हिस्से में पर्दे का इंतजाम करके औरतों के बैठने का अलग इंतजाम किया गया था, जहाँ बड़ी संख्या में महिलाएं नीली कुर्सियों पर बैठकर इस मुबारक महफिल में शरीक हुईं। इस मौके पर मोहल्ले के कई मस्जिदों के इमाम, उलेमा और मोअज्ज़िज़ लोग मौजूद थे। सभी ने मिलकर मुल्क में अमन-ओ-अमान, भाईचारे और खुशहाली के लिए दुआ की। आखिर में सभी के बीच लंगर तकसीम किया गया और लोगों ने हाजी अताउल्लाह खान की इस खिदमत-ए-खल्क की जमकर तारीफ की। Facebook 0 Twitter/X 0 WhatsApp0 Print0 0Shares Post navigation बर्नपुर में 17 से 24 अक्टूबर तक 56वां गुरमत सिखिया कैंप, 27 सितंबर को रक्तदान व स्वास्थ्य शिविर