Facebook 0 Twitter 0 WhatsApp Print 0Shares पब्लिक न्यूज भरत पासवान/ मनोज शर्मा चुरुलिया : पिछले कुछ समय से विद्रोही कवि काजी नजरुल इस्लाम के जन्मस्थान, जामुड़िया के चुरुलिया में काजी नजरुल संग्रह हॉल को लेकर बहस चल रही है। एक उलझन भी खड़ी हो गई है। काजी नजरुल इस्लाम के परिवार वालों का आरोप था कि काजी नजरुल यूनिवर्सिटी काजी नजरुल कलेक्शन पर कब्जा करने की कोशिश कर रही है। हालांकि उन्होंने सीधे तौर पर यह नहीं कहा, लेकिन उन्होंने दावा किया कि यूनिवर्सिटी के अधिकारी इसे अपने कब्जे में लेने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, काजी नजरुल यूनिवर्सिटी के अधिकारियों ने बार-बार इस मुद्दे से इनकार किया है। हालांकि, आखिरकार सोमवार को पूरा मामला सुलझ गया। जब काजी नजरुल यूनिवर्सिटी के मौजूदा वाइस चांसलर डॉ. प्रोफेसर उदय बंदोपाध्याय और दूसरे अधिकारी कवि के जन्मस्थान आए। उन्होंने हर चीज का निरीक्षण किया और उसका जायजा भी लिया। यह बात पूरी हो गई है कि जब तक म्यूजियम का जीर्णोद्धार नहीं हो जाता, कवि की याद से जुड़ी सभी चीजें गांव के यूथ हॉस्टल में रखी जाएंगी। संग्रह का जीर्णोद्धार हो जाने के बाद, उन्हें वापस यहां लाया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि क्यूरेटर 29 दिसंबर को चुरुलिया आएंगे। वह सब कुछ देखेंगे और कवि का सामान बैग में डाल देंगे। उन्हें यूथ हॉस्टल ले जाया जाएगा। वहां उन्हें ध्यान से रखा जाएगा। फिर, नए साल की शुरुआत में, यानी 3 जनवरी से, म्यूजियम को रेनोवेट करने का काम ऑफिशियली शुरू हो जाएगा। पूरे काम की देखरेख वेस्ट बर्दवान डिस्ट्रिक्ट एडमिनिस्ट्रेशन और काजी नजरूल यूनिवर्सिटी के अधिकारी करेंगे। इस दौरान बीडीओ तापस पाल, एडीएम कौशिक सिन्हा, पर्यटन प्रभारी अदिति गांगुली, नजरुल विद्यापीठ के प्रधानाध्यापक दीपांकर मजूमदार, प्रसेनजीत घोष, काजी नजरुल इस्लाम के परिवार की तरफ से सोनाली काजी सहित ग्रामीण मौजूद थे। Facebook 0 Twitter 0 WhatsApp Print 0Shares Post navigation 14 वर्षीय किशोर की हत्या के दोषियों को आजीवन कारावास, फिरौती के लिए अपहरण कर की गई हत्या मांगों पर लंबे समय से पहल नहीं होने से भड़की आशा कर्मी करेंगी अनिश्चितकालीन हड़ताल