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पब्लिक न्यूज बर्नपुर:-बर्नपुर में यदुवंशी कल्याण समिति की ओर से विजया मिलन एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने दुर्गा पूजा के इतिहास और समाज में जाति आधारित संगठनों की भूमिका पर अपने विचार व्यक्त किए। वक्ताओं ने कहा कि किसी भी समाज और सभ्यता की पहचान उसकी कला, संस्कृति और परंपराओं से होती है, इसलिए इनके संरक्षण की जिम्मेदारी समाज के प्रत्येक व्यक्ति की है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए समाज के एक विशिष्ट व्यक्ति ने कहा कि दुर्गा पूजा को आज पूरे उत्साह और धूमधाम से मनाया जाता है, लेकिन इसके ऐतिहासिक महत्व और सृष्टि से जुड़े इतिहास के बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। उन्होंने दावा किया कि बंगाल में दुर्गा पूजा की शुरुआत वीर यदुवंशी शासक इच्छाई घोष से जुड़ी हुई है। उन्होंने देउल स्थित स्मृति सौध और पत्थर पर उत्कीर्ण मां के श्याम रूप का उल्लेख करते हुए कहा कि इस ऐतिहासिक विरासत के माध्यम से दुर्गा पूजा के इतिहास के एक नए पहलू को सामने लाया जा रहा है। उनके अनुसार, इस इतिहास को अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रचार मिल रहा है।

वक्ता ने जाति संगठनों की आवश्यकता पर चर्चा करते हुए कहा कि कुछ लोग मानते हैं कि अलग-अलग जातियों के संगठन बनने से समाज में विवाद और टकराव बढ़ सकता है। हालांकि, उन्होंने इस विचार से असहमति जताते हुए कहा कि ऐसे संगठनों का उद्देश्य आपसी संघर्ष नहीं, बल्कि अपनी सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखना है।

उन्होंने कहा, “एक संस्कृति ही समाज और सभ्यता को बचा सकती है। कला, संस्कृति और परंपराओं को जीवित रखने की जिम्मेदारी हमारी है।” उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि इसी उद्देश्य से कहीं यदुवंशी कल्याण समिति, कहीं ग्वाला समिति, कहीं यादव समिति और कहीं कुर्मी समिति जैसे संगठन बनाए गए हैं।

वक्ताओं ने समाज के लोगों से अपनी सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखने, परंपराओं को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने और सामाजिक एकता को मजबूत करने का आह्वान किया।

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