आसनसोल में जमीन विवाद को लेकर भारी तनाव, सेल आईएसपी और निजी जमीन मालिक आमने-सामने


पब्लिक न्यूज भरत पासवान पश्चिम बर्धमान, आसनसोल:आसनसोल के मनोज सिनेमा हॉल से सटे इलाके में गुरुवार को जमीन कब्जे को लेकर भारी तनाव फैल गया। सेल आईएसपी (SAIL ISP) की एक जमीन को लेकर सेल प्रबंधन और एक निजी जमीन मालिक के बीच आमने-सामने की स्थिति बन गई, जिससे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल देखा गया।
सेल आईएसपी प्रबंधन का दावा है कि विवादित जमीन उनकी स्वामित्व वाली है। वहीं, संबंधित निजी जमीन मालिक का कहना है कि उनके पास उस जमीन से जुड़े सभी वैध दस्तावेज और कागजात मौजूद हैं और वह जमीन सेल की नहीं है।
जानकारी के मुताबिक, पूरा विवाद दो अलग-अलग प्लॉट नंबरों को लेकर है। आरोप है कि जिस जमीन को सेल प्रबंधन अपनी बता रहा है, वहां पहुंचने के लिए दूसरे व्यक्ति की निजी जमीन से होकर जाना पड़ता है। इसी बात को लेकर जमीन मालिक ने कड़ा विरोध जताया।
जमीन मालिक ने आरोप लगाते हुए कहा,
“अगर वह जमीन वास्तव में सेल की है, तो वहां नोटिस बोर्ड या साइन बोर्ड लगाया जाए। लेकिन हमारी निजी जमीन से होकर आना-जाना या बाउंड्री तोड़कर घुसना किसी भी हालत में स्वीकार्य नहीं है। हमारे गेट का ताला तोड़कर अंदर घुसना पूरी तरह गैरकानूनी है।”
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और काफी देर तक स्थिति को नियंत्रित किए रखा, ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना न हो।
हालांकि आरोप है कि अंततः संबंधित गेट का ताला तोड़ दिया गया और जमीन की बाउंड्री के एक हिस्से को क्षतिग्रस्त कर सेल प्रबंधन ने अपनी बताई जा रही जमीन पर बोर्ड लगा दिया।
इस घटना से नाराज निजी जमीन मालिक ने कहा,
“जिन लोगों ने मेरा गेट का ताला तोड़ा और जबरन मेरी जमीन से होकर गए, उनके खिलाफ मैं कानूनी कार्रवाई करूंगा।”
दोपहर करीब 2 बजे से शाम 7 बजे तक लगातार चले तनाव के बाद स्थिति कुछ हद तक सामान्य हुई। फिलहाल पूरे मामले पर पुलिस प्रशासन नजर बनाए हुए है।

पानी और सुरक्षा की मांग को लेकर इंटक का बर्नपुर टाउन कार्यालय के सामने प्रदर्शन

पब्लिक न्यूज बर्नपुर।श्रमिक संगठन इंटक (INTUC) की ओर से आज बर्नपुर टाउन कार्यालय के सामने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया गया। यह प्रदर्शन पीने के पानी की भारी किल्लत और कर्मचारियों के क्वार्टरों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की मांग को लेकर किया गया।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि बर्नपुर रांगापाड़ा न्यू टाउन टाउनशिप में लंबे समय से पानी की गंभीर समस्या बनी हुई है। इस समस्या को लेकर कई बार प्रबंधन से शिकायत की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। पानी की कमी के कारण कर्मचारियों और उनके परिवारों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
इंटक नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि टाउनशिप के क्वार्टरों में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कमजोर है। उनका कहना है कि जब भी कोई कर्मचारी अपने क्वार्टर से बाहर जाता है, चोरी की घटनाएं सामने आ रही हैं। सुरक्षा बढ़ाने की मांग भी बार-बार प्रबंधन के सामने रखी गई, लेकिन इस पर भी कोई कार्रवाई नहीं की गई।
इन्हीं समस्याओं से मजबूर होकर आज इंटक ने विरोध प्रदर्शन किया और टाउन कार्यालय के अधिकारियों को एक ज्ञापन सौंपा। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही पानी की समस्या का समाधान और सुरक्षा व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में इंटक के कार्यकर्ता मौजूद रहे और उन्होंने प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी की।

बीसीसी चैलेंज ट्रॉफी में सीआईएसएफ ने परास्त कर एसएमएस बनी विजेता


पब्लिक न्यूज भारत पासवान बर्नपुर : बर्नपुर क्रिकेट क्लब मैदान में बीसीसी चैलेंज ट्रॉफी का फाइनल मैच रविवार की शाम आयोजित किया गया।
इस टूर्नामेंट की शुरूआत 4 दिसम्बर को हुई थी। इसमें कुल 12 टीमों ने हिस्सा लिया था, जिसमें सभी सेल आईएसपी के अलग अलग विभाग ने हिस्सा लिया था। वही इस टूर्नामेंट के फाइनल मैच में एसएमएस का मुकाबला सीआईएसएफ के बीच हुआ। फाइनल मैच में सीआईएसएफ की टीम ने निर्धारित 8 ओवर में 117 रन बनायी, इसके जबाव में बल्लेबाजी करने उतरी एसएमएस की टीम ने शानदार बल्लेबाजी कर 5 विकेट से मैच को जीत जितने के साथ विजेता बनी। मैच की शुरूआत करने के दौरान सीजीएम प्राभारी यूपी सिंह थे। जबकि फाइनल में सीआईएसएफ के डीआईजी प्रबोध चंद मौजूद थे। उन्होंने विजेता टीम को शील्ड, 5 हजार रुपये का पुरस्कार दिया। जबकि उपविजेता टीम को शील्ड और 3 हजार रुपए दिए। इसके अलावा अन्य पुरुस्कार प्रदान किया।

सेल-आई एस पी ने 4.3 एम टी पी ए क्षमता वाले अत्याधुनिक ब्लास्ट फर्नेस हेतु डेनियली कोरस कंसोर्टियम के साथ अनुबंध किया

पब्लिक न्यूज भरत पासवान बर्नपुर : सेल-इस्को स्टील प्लांट, बर्नपुर ने अपने 4.08 मिलियन टन प्रतिवर्ष क्रूड स्टील विस्तार परियोजना के तहत 4.3 मिलियन टन प्रतिवर्ष हॉट मेटल उत्पादन क्षमता वाले अत्याधुनिक ब्लास्ट फर्नेस की स्थापना के लिए डेनियली कोरस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और डेनियली कोरस बी.वी., नीदरलैण्ड के कंसोर्टियम के साथ अनुबंध सम्पन्न किया। प्रस्तावित ब्लास्ट फर्नेस का उपयोगी वॉल्यूम 5557 घन मीटर होगा, जो देश के सबसे उन्नत और उच्च क्षमता वाले फर्नेस में से एक होगा। इस ब्लास्ट फर्नेस में टॉप-फायर्ड हॉट ब्लास्ट स्टोव, ड्राई गैस क्लीनिंग प्लांट, टॉप प्रेशर रिकवरी टर्बाइन, स्लैग ग्रैनुलेशन प्लांट, पम्प हाउस, स्टॉक हाउस, कास्ट हाउस तथा पूर्णतः एकीकृत डस्ट-रहित प्रणाली जैसी अत्याधुनिक सुविधाएँ शामिल होंगी।
विशेष रूप से, टॉप-फायर्ड हॉट ब्लास्ट स्टोव और ड्राई गैस क्लीनिंग प्लांट का उपयोग पहली बार किसी भी सेल संयंत्र में किया जाएगा, जो ऊर्जा दक्षता, पर्यावरणीय प्रदर्शन और तकनीकी उत्कृष्टता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सेल-आई एस पी का यह कदम देश की आधुनिक स्टील उत्पादन क्षमता को और सुदृढ़ करेगा तथा अग्रणी तकनीक अपनाने के प्रति उसके सतत संकल्प को दर्शाता है।

आदिवासी समुदाय के जमीनदाताओं, युवाओं को आधुनिकीकरण में मिले नौकरी, मुआवजा

पब्लिक न्यूज भरत पासवान बर्नपुर : आदिवासी स्टूडेंट एंड यूथ फोरम के बैनर तले आदिवासी समाज के लोगों ने सेल आईएसपी में होने जा रहे आधुनिकीकरण को लेकर अपनी मांगों के समर्थन में रैली निकाल टनेल गेट समीप आईएसपी के निदेशक प्रभारी कार्यालय के मुख्य गेट समक्ष जोरदार प्रदर्शन किया। इस सैकड़ों आदिवासी युवाओं ने हाथों मांगों से संबंधित पोस्टर लेकर मांगों के संबंध में नारेबाजी की। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे संस्था के अध्यक्ष हीरालाल सोरेन ने बताया कि वर्ष 2006 में जब आखिरी बार सेल आईएसपी में आधुनिकीकरण हुआ था। तब उसके लिए आदिवासी और गैर आदिवासी दोनों समाज के लोगों ने अपनी जमीन दी थी लेकिन देखा गया कि पैसा तो सभी को मिला। लेकिन नौकरी सिर्फ गैर आदिवासी समाज के लोगों को मिली। एक बार फिर सेल आईएसपी में आधुनिकीकरण होने जा रहा है। इसलिए उन्होंने मांग की है कि जमीन देने वाले सभी को पैसे के साथ-साथ नौकरी भी योग्यता के अनुसार मिलनी चाहिए। इसी मांग को लेकर रैली निकाली गई जिसमें हजारों की संख्या में आदिवासी समाज के लोग शामिल हुए। इनका कहना था कि 2006 में जब सेल आईएसपी का आधुनिकीकरण हुआ था तब आदिवासी समाज के लोगों को नौकरी पाने के मामले में वंचित किया गया था। ऐसा फिर से न हो यह सुनिश्चित करने के लिए आज की यह रैली निकाली गई। उन्होंने कहा कि सेल आईएसपी के आसपास 29 आदिवासी गांव है, जिसमें हजारों की संख्या में आदिवासी रहते हैं। उन्होंने कहा कि आधुनिकीकरण के लिए जो जमीन जरूरत है। उसका 50 फीसदी आदिवासी समाज के लोगों द्वारा उपलब्ध कराया गया है, लेकिन फिर भी नौकरी पाने के मामले में आदिवासी समाज के लोगों को वंचित किया जाता है। वहीं प्रदर्शन के पश्चात एक प्रतिनिधिमंडल ने चार सूत्रों से मांगों से संबंधित ज्ञापन सीजीएम इंचार्ज एचआर उमेंद्र पाल सिंह को ज्ञापन सौंपा। इस दौरान संस्था के संजय हांसदा, गुरुदास किस्कू, बुद्धेश्वर हांसदा, मालती किस्कू, शांति मुर्मू, मौसमी बास्की, बनमाली हांसदा, शिवानी हांसदा, दुर्गादास मुर्मू सहित काफी संख्या में महिला, पुरुष मौजूद थे।

SAIL BONUS 2025 : NJCS बैठक बेनतीजा, कर्मियो में आक्रोश, 31000 पर भी नहीं माना प्रबंधन, यूनियन के खिलाफ कर्मियों में भारी रोष


पब्लिक न्यूज आसनसोल: स्टील अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया लिमिटेड में कार्यरत करीब 50000 कार्मिकों के वार्षिक बोनस को लेकर एनजेसीएस की बैठक में सहमति नहीं बन पाई। सुबह से लेकर देर रात तक चली बैठक बेनतीजा समाप्त हुई। इस बैठक मैं बोनस को लेकर यूनियन ही बंटी हुई रही। प्रबंधन 29500 के राशि पर अड़ा रहा वहीं यूनियन ने 40500 से घटते – घटते 31000 पर आ गए। लेकिन फिर भी प्रबंधन राजी नहीं हुआ। इसके बाद सोशल मीडिया पर कार्मिक प्रबंधन और यूनियन नेताओं पर जमकर भड़ास निकाल रहे हैं। अब इस स्थिति में लग रहा है कि प्रबंधन पहले की तरह ही कार्मिकों के खाते में राशि स्वत: ट्रांसफर कर देगा.


सीटू की ओर से प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा गया कि स्पात उद्योग में ASPILS (बोनस) उपसमिति की बैठक का परिणाम – 20-9-202520 सितंबर 2025 को आयोजित इस्पात उद्योग की ASPILS (बोनस) उपसमिति की बैठक में CITU/SWFI के प्रतिनिधि ललित मोहन मिश्रा और विश्वरूप बंद्योपाध्याय ने भाग लिया। बैठक में श्रमिक प्रतिनिधियों ने CITU और AITUC जैसे संगठनों के साथ मिलकर ASPILS/बोनस फॉर्मूले पर आपत्ति जताई, जो पिछले वर्षों में बोनस भुगतान को आधे से भी कम कर देता है। 2023 और 2024 की तुलना में 2022 के बावजूद उत्पादन में निरंतर वृद्धि हुई है।श्रमिक प्रतिनिधियों ने मांग की कि ASPILS/बोनस भुगतान 40500 रुपये से कम नहीं होना चाहिए, जैसा कि 2022 में भुगतान किया गया था। इसके अलावा, उन्होंने मजदूरी संशोधन, 39 महीनों के बकाया भुगतान, और अनुबंध श्रमिकों के हित में अतिरिक्त इंक्रीमेंट की मांग की।


प्रबंधन ने ASPILS/बोनस फॉर्मूले को जारी रखने और 29500 रुपये भुगतान की पेशकश की, जिसे श्रमिकों ने अस्वीकार कर दिया। उन्होंने फॉर्मूला बदलने और बोनस भुगतान में सुधार की मांग दोहराई। हालांकि, बैठक में CITU प्रतिनिधि ने प्रबंधन के 32500 रुपये के प्रस्ताव पर आपत्ति नहीं जताई, लेकिन प्रबंधन की अड़ियल और श्रमिक-विरोधी रवैये के कारण बैठक बिना किसी नतीजे के समाप्त हो गई।प्रबंधन ने 31000 रुपये के प्रस्ताव पर भी कोई जवाब नहीं दिया, जिससे श्रमिकों में रोष है। ललित मोहन मिश्रा, CITU के महासचिव, SWFI ने मांग की कि सभी संयंत्रों और प्रतिष्ठानों में तत्काल आंदोलन शुरू किया जाए ताकि श्रमिकों के वैध हकों की रक्षा हो सके।

टीएमसी पार्षद अशोक रुद्रा ने आज बर्नपुर में त्रिवेणी मोड़ के पास अपने पार्टी कार्यालय में एक संवाददाता सम्मेलन किया उन्होंने कहा कि एक अफवाह उड़ाई जा रही है कि बर्नपुर पोस्ट ऑफिस अपनी वर्तमान जगह से हटाया जा रहा

आसनसोल बर्नपुर पब्लिक न्यूज – टीएमसी पार्षद अशोक रुद्रा ने आज बर्नपुर में त्रिवेणी मोड़ के पास अपने पार्टी कार्यालय में एक संवाददाता सम्मेलन किया उन्होंने कहा कि एक अफवाह उड़ाई जा रही है कि बर्नपुर पोस्ट ऑफिस इस समय जिस जगह पर है वहां से उसे हटाया जा रहा है जिस वजह से लोगों में काफी ऊहापोह की स्थिति बनी हुई है। अशोक रूद्र ने कहा कि इस पोस्ट ऑफिस पर इस क्षेत्र के कई लोग व्यापारी इसको कर्मचारी रेलवे के कर्मचारी वरिष्ठ नागरिक निर्भर हैं। वहां पर जो स्टेट बैंक है उसकी जगह को भी काम कर दिया गया है इसको द्वारा जो पैसा लिया जाता था रिन्यू करने के समय उसको लेकर काफी बातचीत की गई आखिरकार 4 लाख में तय किया गया लेकिन जगह कम कर दिए जाने की वजह से वहां के दुकानदारों को समस्या हो रही है आज स्थिति को जानने के लिए वह खुद बर्नपुर हेड पोस्ट ऑफिस गएथे पुराने स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया के चीफ मैनेजर से भी बात की उन्होंने कहा कि इतना ही नहीं मार्केट पोस्ट ऑफिस का भी हटाने के बाद लगातार लगभग 4 सालों से कहीं जा रही है जिसे लोगों ने अभी आंदोलन करके रोक रखा है लेकिन इसको मार्केट पोस्ट ऑफिस के रख रखाव को लेकर बिल्कुल गंभीर नहीं है।

বার্নপুরে দুটি নির্মাণ নিয়ে এলাকার বাসিন্দাদের প্রশ্ন / কাঠগড়ায় সেল আইএসপি কতৃপক্ষের ভূমিকা / স্মারকলিপি কাউন্সিলরকে…………বার্নপুর, ২৫ জুনঃ

পাবলিক নিউজ ডেস্ক:-আসানসোল পুরনিগমের বার্নপুর এলাকার তৃনমুল কংগ্রেসের কাউন্সিলর অশোক রুদ্র বার্নপুরের একটি জমিতে দুটি নির্মাণ প্রকল্প নিয়ে প্রশ্ন তুলেছেন। তিনি বলেন, যে জমিতে এই দুটি নির্মাণ প্রকল্প চলছে, সেখানে দুটি ছোট দোকান এবং একটি শিব মন্দির ছিলো যেখানে আগে গণেশ পূজা হতো। কিন্তু এখন সেখানে কয়েক হাজার বর্গফুটের দুটি বড় ভবন তৈরি হচ্ছে। তিনি আরো বলেন, এলাকার মানুষ, ক্ষুদ্র কৃষকরা, এই সংক্রান্ত একটি স্মারকলিপি আমার কাছে জমা দিয়েছেন। তাতে তারা এই নির্মাণ কাজটি বৈধ না অবৈধ তা খুঁজে বার করার জন্য অনুরোধ করেছেন। তিনি বলেন, এখানে আগে বলা হয়েছিল যে একটি আউটলেট তৈরি করা হবে। সেই সময় কিন্তু কেউ এর বিরোধিতা করেননি। কারণ এখানে একটি শিব মন্দির, দুটি দোকান এবং গণেশ পূজা হতো। তাই প্রথমে কিছুটা ঝামেলা হয়েছিলো। কিন্তু স্থানীয় কাউন্সিলর হওয়ার কারণে আমি  স্থানীয় জনগণের সাথে বসে শান্তিপূর্ণভাবে বিষয়টি সমাধান করেছিলাম।  কিন্তু এখন স্থানীয় জনগণ বলছেন যে এখানে দুটি নির্মাণ কাজ অবৈধভাবে করা হচ্ছে। অশোক রুদ্র প্রশ্ন তোলেন, যখন এই বার্নপুরে স্থানীয় দোকানদারদের তাদের ছোট দোকানে কোনও মেরামতের কাজ করতে হলে নানা ধরনের সমস্যার সামনে পড়তে হয়। তখন দোকানদারদের বার্নপুর সেল আইএসপির কাছ থেকে অনুমতি নিতে ক্লান্ত হতে হয়।

এখন এখানে দুটি বড় ভবন তৈরি হচ্ছে, যার বিষয়ে মানুষের সন্দেহ আছে যে এগুলি অবৈধ হতে পারে? তাহলে এই জিনিসটি কিভাবে আধিকারিকদের চোখ এড়িয়ে গেল? তিনি বলেন, প্রাথমিকভাবে যখন স্থানীয় মানুষেরা প্রতিবাদ করেছিল, তখন সেল আইএসপি বা ইস্কো কারখানা কতৃপক্ষ জনগণকে আশ্বস্ত করেছিলেন যে শিব মন্দিরের জন্য অন্য জায়গা দেওয়া হবে।  অন্য জায়গায় গণেশ পূজার ব্যবস্থা করা হবে, কিন্তু তেমন কিছুই হয়নি। এদিকে, স্থানীয় মানুষ বলছেন যে এখানে অবৈধ নির্মাণ করা হচ্ছে। অশোক রুদ্র অভিযোগ করেছেন যে, সেল আইএসপি কতৃপক্ষের একাংশের যোগসাজশ ছাড়া এটি করা সম্ভব নয়। তিনি বলেন, আমি সেল আইএসপির ঊর্ধ্বতন আধিকারিকদের এ বিষয়ে অবহিত করবো। এর পাশাপাশি আমি রাজ্যের মুখ্যমন্ত্রী মমতা বন্দ্যোপাধ্যায়কেও জানাবো। অবহিত করবো দিল্লিতে সেল আধিকারিকদেরও। তিনি দাবি করেন যে, সেল আইএসপির আধিকারিকদের  বলতে হবে যে, দুটি নির্মাণ করা হচ্ছে তা বৈধ না অবৈধ।
তবে এই অভিযোগ নিয়ে সেল আইএসপি কতৃপক্ষের কোন প্রতিক্রিয়া পাওয়া যায় নি।

দেরাদুনে দুদিনের ” এইচএসএফইএ ২০২৫” সম্মেলন / বার্নপুর সেল আইএসপির মুকুটে “সেফটি এক্সেলেন্স অ্যাওয়ার্ড”…………., বার্নপুর, ১০ এপ্রিলঃ

পাবলিক নিউজ আসানসোল :– বার্নপুর সেল আইএসপি বা ইস্কো কারখানাকে “সেফটি এক্সেলেন্স অ্যাওয়ার্ড”-এ ভূষিত করা হয়েছে ইন্টারন্যাশনাল সাসটেইনেবিলিটি কনফারেন্স অন হেলথ সেফটি, ফায়ার অ্যান্ড এনভায়রনমেন্টাল অ্যাডভান্সেস ( এইচএসএফইএ ২০২৫ )-এ। এই সম্মেলন ৯ ও ১০ এপ্রিল দেরাদুনে অনুষ্ঠিত হয়। যার আয়োজক ছিল ইউপিইএস, দেরাদুনের স্কুল অব অ্যাডভান্সড ইঞ্জিনিয়ারিং-এর সাসটেইনেবিলিটি ক্লাস্টার।
এই মর্যাদাপূর্ণ পুরস্কারটি মেটাল ইন্ডাস্ট্রির ক্ষেত্রে নিরাপত্তা ব্যবস্থায় অসাধারণ অবদানের জন্য বার্নপুর সেল আইএসপি বা ইস্কো কারখানাকে স্বীকৃতি হিসেবে প্রদান করা হয়েছে।
এইচএসএফইএ ২০২৫ ছিল এই অঞ্চলের সবচেয়ে বড় সম্মেলন। যেখানে অংশগ্রহণ করেন সুরক্ষা বিশেষজ্ঞ, কর্পোরেট নেতা, শিক্ষাবিদ ও চিন্তাবিদরা। এতে পাওয়ার, এনার্জি, প্রজেক্ট ম্যানেজমেন্ট কনসালটেন্সি, স্টিল, অয়েল অ্যান্ড গ্যাস, কনস্ট্রাকশন, রিয়েল এস্টেট, ফার্টিলাইজার, কেমিক্যাল এবং এনভায়রনমেন্টাল হেলথ অ্যান্ড সেফটি ( ইএইচএস)-র সাথে জড়িত বিভিন্ন শিল্প প্রতিষ্ঠান সক্রিয়ভাবে অংশগ্রহণ করে।
সম্মেলনে উপস্থিত উল্লেখযোগ্য সংস্থাগুলোর মধ্যে ছিল ওএনজিসি, সেল, এইপিসিএল, এনএফএল, জিন্দাল স্টেনলেস, ইআইএল, আইটিসি টেকনিপ, টাটা প্রজেক্ট এবং এল এন্ড টি। যা এই অনুষ্ঠানকে বিভিন্ন শিল্পক্ষেত্রে স্থায়িত্ব ও নিরাপত্তা সংক্রান্ত আলোচনার একটি গুরুত্বপূর্ণ মঞ্চ হিসেবে প্রতিষ্ঠিত করে।

বার্নপুর সেল আইএসপির সম্প্রসারণ / বিদেশি বিশেষজ্ঞদের উপস্থিতিতে ভাঙা হলো ৭০ বছরের পুরনো ৫ টি কুলিং টাওয়ার……………বার্নপুর,

পাবলিক নিউজ আসানসোল :– রামনবমী রবিবার সকালে ইস্পাত নগরী বার্নপুর সহ গোটা শিল্পাঞ্চল একটি ঐতিহাসিক ঘটনার স্বাক্ষী থাকলো। বার্নপুর ইস্কো কারখানা বা সেল আইএসপিতে পূর্ব ঘোষণা মতো ভেঙে ফেলা হলো ৫ টি কুলিং টাওয়ার। নতুন প্ল্যান্ট সম্প্রসারণের জন্য আইএসপির ভেতরে ৫ টি কুলিং টাওয়ার ভেঙে ফেলা হলো বলে, কারখানার মুখ্য জনসংযোগ আধিকারিক ভাস্কর কুমার জানিয়েছেন।
তিনি বলেন, এদিন বার্নপুর সেল আইএসপির পাঁচটি আইকনিক কুলিং টাওয়ার ভেঙে ফেলা হয়। ৭০ বছরের পুরনো পাঁচটি হাইপারবোলিক কংক্রিট ন্যাচারাল ড্রাফ্ট কুলিং টাওয়ার। প্রতিটি ৭২ মিটার উঁচু এবং ৩০-৪৮ মিটার ব্যাসের। এদিন সকাল ১২.১৫ মিনিটে ভেঙে ফেলা হয়।
প্রাথমিক ভাঙার জন্য সবচেয়ে নিরাপদ এবং সবচেয়ে সাশ্রয়ী পদ্ধতি হল বিস্ফোরক নিয়ন্ত্রিত ব্যবহারের মাধ্যমে কাঠামোগত ধস নামানো। এর পরে হাইড্রোলিক সরঞ্জাম লাগানো খননকারী যন্ত্র ব্যবহার করে সেকেন্ডারি পার্টের কাজ করা হয়।দক্ষিণ আফ্রিকার বিস্ফোরক ধ্বংসকারী বিশেষজ্ঞ মেসার্স জেট ডেমোলিশন ( পিটিওয়াই ) লিমিটেডের সহায়তায় মুম্বাইয়ের মেসার্স এডিফাইস ইঞ্জিনিয়ারিং সংস্থার সঙ্গে এই কাজের জন্য চুক্তি হয়েছিলো ।আরো বলা হয়েছে, যেহেতু কুলিং টাওয়ারগুলির কোনও কাঠামোগত অঙ্কন পাওয়া যায়নি, তাই মূল ভৌত বৈশিষ্ট্যগুলি, যেমন রিং বিমের উপরে শেলের পুরুত্বের টেপারিং এবং স্টিল রিইনফোর্সমেন্ট বারগুলির বিশদ স্থান স্থাপনের পরে সরাসরি স্থান তদন্তের মাধ্যমে নির্ধারণ করা হয়েছিল।
আগে স্থান পরিদর্শন এবং অতীতের অভিজ্ঞতা থেকে চাক্ষুষ পর্যবেক্ষণের ভিত্তিতে প্রাথমিক ভাঙ্গার নকশা প্রস্তুত করা হয়েছিল। ভাঙার স্থান প্রস্তুতির কাজ শুরু করার সময় ও স্থান স্থাপনের পরে প্রকৃত কুলিং টাওয়ারের কাঠামোগত বিবরণ স্থাপনের জন্য অতিরিক্ত তদন্ত করা হয়েছিল। তাই ভাঙ্গার নকশার কিছু দিক উপকারী বা প্রয়োজনীয় বলে বিবেচিত হিসাবে সংশোধন করা হয়েছিল।
জানা গেছে, এই টাওয়ারগুলি ১৯৫০ সালে নির্মিত হয়েছিলো, যখন এই কারখানায় ব্লাস্ট ফার্নেস তৈরী করা হয়। সুতরাং এগুলি প্রায় ৭০ বছরের পুরানো।
এদিন কয়েক সেকেন্ডের মধ্যে পাঁচটি কুলিং টাওয়ারে ব্লাস্টিং বা বিস্ফোরণ ঘটানো হয়। আর তার কয়েক সেকেন্ডের মধ্যে পাঁচটি কুলিং টাওয়ার মাটিতে মিশে যায়। এই প্রক্রিয়া চলার সময় যাতে কোন সমস্যা ও আশপাশে ক্ষতি না হয়, তারজন্য প্রয়োজনীয় সব পদক্ষেপ ও ব্যবস্থা নেওয়া হয়েছিলো। এই কাজের জন্য এদিন সকাল আটটা থেকে বিকেল পর্যন্ত বার্নপুরের রিভারসাইড এলাকার দুটি বিদ্যুৎ সাবস্টেশন বন্ধ রাখা হয়।
প্রসঙ্গতঃ, এই ধরনের কুলিং টাওয়ার ভাঙার জন্য ভারতে কোনও বিশেষজ্ঞ নেই। তাই বিদেশ থেকে বিশেষজ্ঞদের ডাকা হয়েছিলো। আগেই বলা হয়েছিলো ৫ টি কুলিং টাওয়ার এমনভাবে ভেঙে ফেলা হবে, যাতে সেগুলির জন্য আশপাশের কোনকিছু না হয়। এমনভাবে একই জায়গায় ভেঙে ফেলা হবে, যাতে আশেপাশের এলাকার কোনও ক্ষতি হবে না। বিশেষজ্ঞরা আগেই বলেছিলেন , এত বড় টাওয়ার ভেঙে ফেলার দৃশ্য দেখতে খুবই রোমাঞ্চকর হবে। এদিন তেমন দৃশ্য দেখাও গেলো।
উল্লেখ্য, এবারের সম্প্রসারণের ফলে বার্নপুর ইস্কো কারখানা বা সেল আইএসপির লক্ষ্যমাত্রা ৭ মিলিয়ন টন হবে। এই উৎপাদনের লক্ষ্যমাত্রার পরে সেল আইএসপি দেশের অন্যতম বৃহৎ ইস্পাত কারখানার তকমা পাবে। এই পর্যায়ের সম্প্রসারণে ব্যয় প্রায় ৩৫ হাজার কোটি টাকা হবে বলে জানা গেছে। এর কাজ ইতিমধ্যেই শুরু হয়েছে। এটি সম্পূর্ণ হতে প্রায় ৫ বছর সময় লাগবে। এর পরে বার্নপুরের আমুল পরিবর্তন হবে।
নতুন সম্প্রসারণ থেকে কর্মসংস্থান ও উন্নয়ন আরো হবে। নতুন প্রজেক্ট আসায় শুধুমাত্র আইএসপির সাথে যুক্ত লোকদের ভবিষ্যতই উন্নত করবে না এমনটা নয়। আসানসোল পুরনিগমের বার্নপুর এলাকা এবং আশেপাশের গ্রামগুলির উন্নয়ন ও কর্মসংস্থানেও গুরুত্বপূর্ণ ভূমিকা পালন করবে এই সম্প্রসারণ। সেল আইএসপির কাছাকাছি বসবাস করা শিক্ষিত বেকারদের কর্মসংস্থানের সম্ভাবনা বাড়বে এবং শহরের উন্নয়নের সঙ্গে সঙ্গে সাধারণ মানুষের জীবনযাত্রার মানও বদলে যাবে। শহরের বিন্যাস বদলে যাবে এবং বিশ্বস্তরে বার্নপুর শহরের নিজস্ব একটা পরিচয় উঠে আসবে ।
সেল আইএসপির কুলিং টাওয়ার কি? বিশেষজ্ঞরা জানাচ্ছেন, একটি কুলিং টাওয়ার হল একটি বিশেষ তাপ এক্সচেঞ্জার ও পরিবর্তনকারী যন্ত্র । যেখানে বায়ু এবং জলকে জলের তাপমাত্রা কমাতে একে অপরের সাথে সরাসরি যোগাযোগে আনা হয়। ইস্পাত প্ল্যান্টের জন্য কুলিং টাওয়ারের প্রয়োজন হয়। যাতে উৎপাদন প্রক্রিয়া চলাকালীন উৎপন্ন বর্জ্য তাপ অপসারণ করা যায় ও সরঞ্জামের নির্ভরযোগ্যতা নিশ্চিত করা যায়। পাশাপাশি বিভিন্ন অ্যাপ্লিকেশনে ব্যবহৃত শীতল জলের মাধ্যমে অপারেশনাল দক্ষতা বজায় রাখা যায়।
প্রসঙ্গতঃ, বার্নপুরে স্টিল অথরিটি অফ ইন্ডিয়ার ইস্কো স্টিল প্ল্যান্টের এর আগে প্রতি বছর ২.৫ মিলিয়ন টন অপরিশোধিত ইস্পাত উৎপাদন ক্ষমতা ছিলো। পরে তা তা বাড়িয়ে ৫ মিলিয়ন টন করা হয়েছিলো। ১৯১৮ সালে প্রতিষ্ঠিত ইন্ডিয়ান আয়রন অ্যান্ড স্টিল কোম্পানি, যা একসময় মার্টিন বার্ন গ্রুপের পতাকাবাহী জাহাজ ছিল। ২০০৬ সালে সেলের সাথে বার্নপুর ইস্কো কারখানার সংযুক্তিকরণ হয়। তারপর এর নাম সেল আইএসপি বা ইস্কো স্টিল প্ল্যান্ট হয়। প্রথম পর্যায়ের সম্প্রসারণে প্রায় ১৬ হাজার কোটি টাকা ব্যয় করা হয়েছিলো।