Facebook 0 Twitter/X 0 WhatsApp0 Print0 0Shares Publicnewz सालानपुर: मैथन बांध पर डीवीसी की करीब 1200 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित 234 मेगावाट के फ्लोटिंग सोलर पावर प्रोजेक्ट को लेकर एक बार फिर गतिरोध की स्थिति बन गई है। डोमदहा, कालीपाथर, सिद्धाबाड़ी, लाधना, वृंदावनी, बाथानबाड़ी समेत 12 गांवों के विस्थापित परिवारों ने स्पष्ट कर दिया है कि पुरानी मांगें पूरी किए बिना वे नए सोलर प्रोजेक्ट का काम शुरू नहीं होने देंगे।इसी मुद्दे को लेकर शुक्रवार को रामचंद्रपुर कम्युनिटी हॉल में त्रिपक्षीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में डीवीसी के डीजीएम एडमिनिस्ट्रेशन सुखमय नायक, डीजीएम शैलेन्द्र कुमार, सीएसआर हेड, सालानपुर थाना प्रभारी विश्वजीत मंडल, कल्याणेश्वरी फांड़ी प्रभारी पार्थ सरकार, सालानपुर बीडीओ कार्यालय के प्रतिनिधि समेत अन्य अधिकारी मौजूद थे। दूसरी ओर दामोदर वैली विस्थापित संघर्ष समिति के सदस्य और ग्रामीण शामिल हुए।ग्रामीणों का आरोप है कि मैथन बांध के निर्माण के समय उनकी जमीन, घर और खेती की भूमि जलमग्न हो गई थी। उस समय डीवीसी की ओर से नौकरी, स्कूल, पेयजल और मुफ्त बिजली जैसी कई सुविधाएं देने का आश्वासन दिया गया था। ग्रामीणों का कहना है कि करीब 70 साल बीत जाने के बावजूद इन वादों को पूरी तरह लागू नहीं किया गया।एक ग्रामीण ने कहा कि जिनकी जमीन पर बिजली परियोजनाएं बन रही हैं, उन्हीं विस्थापित परिवारों को बिजली के लिए 7 रुपये प्रति यूनिट तक भुगतान करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि कई परिवारों के बिजली बिल 700 से 1000 रुपये तक आ रहे हैं। ग्रामीणों की मांग है कि बांध के आसपास के गांवों को मुफ्त बिजली दी जाए और स्थानीय शिक्षित युवाओं को रोजगार दिया जाए।वहीं, वासुदेव महतो ने कहा कि ग्रामीण एकजुट हैं और मुफ्त बिजली की मांग पूरी नहीं होने तक सोलर प्लांट का काम शुरू नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने 2012 में जमीन वापस देने के कथित आश्वासन का भी जिक्र करते हुए कहा कि अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।डीवीसी के डीजीएम सुखमय नायक ने कहा कि ग्रामीणों की सभी मांगों को लिखित रूप से दर्ज किया गया है। मुफ्त बिजली की मांग पर उन्होंने स्पष्ट किया कि पूरे देश में मुफ्त बिजली देने की कोई व्यवस्था नहीं है। यह सरकार की नीति से जुड़ा विषय है और सरकार की ओर से कोई नीति या निर्देश मिलने पर ही डीवीसी प्रबंधन इस पर निर्णय ले सकता है।हालांकि, उन्होंने क्षेत्र के विकास के लिए डीवीसी की ओर से कई आश्वासन दिए। उन्होंने कहा कि सीएसआर फंड से गांवों में सड़क, स्ट्रीट लाइट, पेयजल और कम्युनिटी हॉल से जुड़े कार्य किए जाएंगे। फिलहाल दो गांवों में मोबाइल हेल्थ वैन पहुंच रही है, जिसे बढ़ाकर तीन-चार गांवों तक किया जाएगा। इसके अलावा लेफ्ट बैंक स्थित स्कूल का भी जीर्णोद्धार किया जा रहा है।रोजगार के मुद्दे पर डीवीसी अधिकारी ने कहा कि स्थायी नौकरी देना संभव नहीं है। हालांकि, सोलर प्रोजेक्ट की ठेकेदार कंपनी एलएंडटी पावर के माध्यम से जितने भी अकुशल श्रमिकों की जरूरत होगी, उन्हें स्थानीय गांवों से प्राथमिकता के आधार पर लिया जाएगा। आईटीआई, डिप्लोमा या सोलर कार्य से संबंधित योग्यता रखने वाले स्थानीय युवाओं को भी प्राथमिकता देने की बात कही गई।डीजीएम ने कहा कि यह भारत सरकार की परियोजना है और इसे लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय से निर्देश प्राप्त हुए हैं। उन्होंने ग्रामीणों से परियोजना में सहयोग करने की अपील की।बैठक का नहीं निकला समाधानकरीब 1200 करोड़ रुपये की लागत वाली इस 234 मेगावाट की फ्लोटिंग सोलर परियोजना को लेकर हुई बैठक में दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन सकी। डीवीसी के डीजीएम ने भी माना कि बैठक अभी सफल नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर दोनों पक्ष दोबारा बैठक करेंगे।फिलहाल ग्रामीणों की मांगों और विरोध के चलते मैथन की प्रस्तावित फ्लोटिंग सोलर परियोजना का भविष्य अनिश्चित बना हुआ है। प्रशासन और डीवीसी अब आगे की बातचीत के जरिए गतिरोध दूर करने की कोशिश में हैं। Facebook 0 Twitter/X 0 WhatsApp0 Print0 0Shares Post navigation रेलवे की विभिन्न मांगों को लेकर चैंबर मुखर, रानीगंज और पांडवेश्वर में डीआरएम को सौंपा ज्ञापन रानीगंज में ‘फूड सेफ्टी ऑन व्हील्स’ अभियान के तहत छापेमारी, 250 किलो चायपत्ती नष्ट