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पब्लिक न्यूज आसनसोल/कालना, 17 जून 2026: हीमोफीलिया सोसायटी-दुर्गापुर शाखा तथा कालना उपमंडलीय एवं सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के संयुक्त तत्वावधान में “हीमोफीलिया का आधुनिक प्रबंधन” विषय पर एक चिकित्सकीय सतत शिक्षा कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों को हीमोफीलिया के आधुनिक उपचार और प्रबंधन संबंधी नवीन जानकारियों से अवगत कराना था।
कोलकाता से आए विशेषज्ञ ने दी महत्वपूर्ण जानकारी
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रोफेसर (डॉ.) सिद्धार्थ शंकर रॉय, परामर्शदाता रक्त रोग विशेषज्ञ, चिकित्सा शिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान तथा मेडिकल कॉलेज अस्पताल, कोलकाता रहे। उन्होंने हीमोफीलिया के लक्षणों, प्रारंभिक पहचान, बुनियादी देखभाल तथा आधुनिक उपचार पद्धतियों पर विस्तृत जानकारी दी।
रक्तस्राव की स्थिति में उपचार संबंधी आवश्यक सावधानियों पर दिया विशेष जोर
डॉ. रॉय ने हीमोफीलिया से पीड़ित मरीजों में रक्तस्राव और दर्द की स्थिति के दौरान चिकित्सकों एवं नर्सिंग कर्मियों द्वारा अपनाई जाने वाली आवश्यक सावधानियों और बचाव संबंधी उपायों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने रोगियों को दिए जाने वाले एंटी-हीमोफीलिक कारक सघन औषधि की उचित मात्रा और उसके सही उपयोग की भी विस्तृत जानकारी प्रदान की।

क्षेत्र में पहली बार हुआ ऐसा शैक्षणिक आयोजन
हीमोफीलिया सोसायटी-दुर्गापुर शाखा के सचिव अजय रॉय ने अस्पताल प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस क्षेत्र में इस प्रकार का शैक्षणिक कार्यक्रम पहली बार आयोजित किया गया है। उन्होंने कहा कि हीमोफीलिया के मरीज के अस्पताल पहुंचते ही तत्काल उपचार शुरू करना अत्यंत आवश्यक है, जिससे गंभीर जटिलताओं और मृत्यु के जोखिम को कम किया जा सके।
अस्पताल प्रशासन ने हर संभव सहयोग का दिया आश्वासन
चिकित्सा विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. उज्ज्वल कुमार भट्टाबल तथा अस्पताल के सहायक अधीक्षक समिन मलिक ने उपमंडल के हीमोफीलिया रोगियों को हरसंभव चिकित्सा सुविधा और सहयोग उपलब्ध कराने का भरोसा दिलाया। उन्होंने मरीजों को स्वस्थ, सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
चिकित्सकों और नर्सिंग कर्मियों की रही सक्रिय भागीदारी
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में चिकित्सकों, नर्सिंग कर्मियों तथा हीमोफीलिया सोसायटी के सदस्यों ने भाग लिया। विशेषज्ञों ने इसे हीमोफीलिया के प्रति जागरूकता बढ़ाने और रोगियों की बेहतर चिकित्सा एवं देखभाल सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और उपयोगी पहल बताया।

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