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भारतीय अप्रेंटिस संघ और डब्ल्यूसीईसीएल फ्रंट ने ईसीएल के सीएमडी और कोल इंडिया चेयरमैन से की नियुक्ति की मांग, आउटसोर्सिंग में मजदूरों के शोषण का भी लगाया आरोप*

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पब्लिक न्यूज पश्चिम बर्दवान:** ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) में अप्रेंटिस का प्रशिक्षण पूरा कर चुके बंगाल के बेरोजगार युवाओं को रोजगार देने की मांग को लेकर भारतीय अप्रेंटिस संघ और डब्ल्यूसीईसीएल फ्रंट ने मोर्चा खोल दिया है। संगठन ने ईसीएल के सीएमडी और कोल इंडिया के चेयरमैन को चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं हुई, तो आगामी 2 नवंबर से अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया जाएगा।

पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए संगठन के एक नेता ने कहा कि बंगाल संघर्ष और आंदोलन की धरती रही है। इस राज्य के महापुरुषों ने देश की आजादी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ऐसे राज्य के युवक-युवतियों का बेरोजगार रहना उचित नहीं है।

उन्होंने कहा कि देश में कोयला खनन का इतिहास बंगाल से जुड़ा रहा है। ईसीएल का मुख्यालय भी बंगाल में है। ऐसे में संगठन चाहता है कि कंपनी में अप्रेंटिस का प्रशिक्षण पूरा कर चुके बंगाल के युवाओं को रोजगार देने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।

संगठन के नेता ने कहा, “हम आपके माध्यम से ईसीएल के सीएमडी और कोलकाता में बैठे कोल इंडिया के चेयरमैन से कहना चाहते हैं कि बंगाल के अप्रेंटिस युवाओं को रोजगार दिया जाए। अगर सीएमडी ने हमारी बात नहीं सुनी, तो 2 नवंबर से हम अनिश्चितकालीन धरने पर बैठेंगे। जब तक नौकरी नहीं मिलेगी, तब तक धरने से नहीं उठेंगे।”

**अन्य कोयला कंपनियों का उदाहरण देकर उठाए सवाल**

संगठन के नेता ने दावा किया कि साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) में मुख्यालय की ओर से सभी एरिया महाप्रबंधकों को रोजगार के संबंध में निर्देश जारी किए गए हैं। उनके अनुसार, एरिया महाप्रबंधकों ने भी संबंधित कंपनियों को पत्र भेजे हैं। संगठन ने इस संबंध में अपने पास प्रमाण होने का दावा किया।

उन्होंने वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (डब्ल्यूसीएल) का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां के ऑपरेटरों ने भी 7 तारीख को सीएमडी का घेराव किया था।

नेता के मुताबिक, संगठन ने 21 सितंबर को सुधांशु चौक के पास गेट के सामने अनिश्चितकालीन धरना दिया था। इसके बाद प्रबंधन की ओर से 15 दिनों का समय मांगा गया। समय पूरा होने पर 5 तारीख को बातचीत हुई और 6 तारीख को पत्र जारी किया गया। हालांकि, इन तारीखों के महीने और पत्र की विषयवस्तु की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

**आउटसोर्सिंग में कम मजदूरी देकर काम कराने का आरोप**

संगठन ने ईसीएल में आउटसोर्सिंग के माध्यम से मजदूरों से कम वेतन पर काम कराने का भी आरोप लगाया। नेता ने दावा किया कि जहां एचपीसी दर के अनुसार मजदूरी लगभग 36 हजार रुपये होनी चाहिए, वहां तीन मजदूरों से 10 से 12 हजार रुपये प्रतिमाह में काम कराया जा रहा है।

उन्होंने इसे मजदूरों का शोषण बताते हुए कहा कि कोलकाता में मुख्यालय होने के बावजूद बंगाल में ही ऐसी स्थिति बनी हुई है। संगठन ने इस मामले में भी प्रबंधन से हस्तक्षेप करने की मांग की।

**अप्रेंटिस अधिनियम का हवाला देकर नियुक्ति की मांग**

रोजगार की मांग के समर्थन में संगठन ने अप्रेंटिस अधिनियम, 1961 का हवाला दिया। नेता का दावा है कि नियमों के तहत अप्रेंटिस प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले युवाओं को संबंधित संस्थान में रोजगार देने का प्रावधान है और उपलब्ध पदों के अनुसार 50 प्रतिशत युवाओं को रखने की बाध्यता है।

हालांकि, अप्रेंटिस अधिनियम के तहत प्रशिक्षण पूरा करने वाले प्रत्येक प्रशिक्षु को स्वतः नौकरी मिलने या हर परिस्थिति में 50 प्रतिशत प्रशिक्षुओं की नियुक्ति अनिवार्य होने के दावे की स्वतंत्र कानूनी पुष्टि आवश्यक है।

संगठन ने स्पष्ट किया कि यदि ईसीएल प्रबंधन ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया, तो 2 नवंबर से अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया जाएगा। अब देखना होगा कि ईसीएल प्रबंधन और कोल इंडिया का नेतृत्व इस मांग पर क्या रुख अपनाता है।

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